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August 3, 2025

मार्क्स: धर्म से ऊपर मानवता, कुप्रथाओं के अंधकार से मुक्ति

मार्क्स: धर्म से ऊपर मानवता, कुप्रथाओं के अंधकार से मुक्ति

Balwant singh pargai samywaadi member of cpiml uttarakhand
संपादक: pargai news agency bageshwar, uttarakhand

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#मार्क्स: धर्म से ऊपर मानवता, कुप्रथाओं के अंधकार से मुक्ति का आह्वान (उत्तराखंड सीपीएमएल सदस्य बलवंत सिंह परगाई का वक्तव्य)

देहरादून, [8/3/2025]* – उत्तराखंड सीपीएमएल (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के सदस्य बलवंत सिंह परगाई ने आज एक प्रेस वार्ता में कार्ल मार्क्स के विचारों को मानवता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने मार्क्स के उस दर्शन पर जोर दिया जिसमें धर्म को मानव कल्याण के मार्ग में बाधक बताते हुए मानवता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही गई है। परगाई ने कहा कि मार्क्स का मानना था कि धर्म लोगों को वास्तविक समस्याओं से भटकाकर उन्हें कुप्रथाओं और अंधविश्वासों के अंधकार में धकेलता है।
परगाई ने मार्क्स के नृजातीय शोध (Ethnographic Research) के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि मार्क्स का शोध ऐतिहासिक भौतिकवाद (Historical Materialism), वर्ग संघर्ष (Class Struggle) और उत्पादन के तरीकों (Modes of Production) पर केंद्रित था। मार्क्स ने समाज को एक ऐसे ढांचे के रूप में देखा जो आर्थिक संबंधों से निर्धारित होता है। उनका दृढ़ विश्वास था कि ये आर्थिक संबंध ही वर्ग संघर्ष और सामाजिक परिवर्तन को जन्म देते हैं।

“मार्क्स का नृजातीय शोध एक जटिल और प्रभावशाली सिद्धांत है जो समाज के अध्ययन के लिए एक शक्तिशाली ढांचा प्रदान करता है,” परगाई ने कहा। “उनके विचारों ने न केवल सामाजिक विज्ञानों को प्रभावित किया है, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों को भी प्रेरित किया है।

*मार्क्स का नृजातीय शोध: एक गहन विश्लेषण

मार्क्स के नृजातीय शोध को समझने के लिए उनके ऐतिहासिक भौतिकवाद के सिद्धांत को समझना आवश्यक है। ऐतिहासिक भौतिकवाद के अनुसार, इतिहास को समझने की कुंजी उत्पादन के तरीकों और आर्थिक संबंधों में निहित है। मार्क्स का मानना था कि समाज में उत्पादन के तरीके (जैसे कि दासता, सामंतवाद, पूंजीवाद) समाज के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक ढांचे को निर्धारित करते हैं।

उन्होंने वर्ग संघर्ष को इतिहास का इंजन बताया। मार्क्स का मानना था कि समाज हमेशा विभिन्न वर्गों के बीच संघर्ष से ग्रस्त रहता है, और यह संघर्ष ही सामाजिक परिवर्तन को गति प्रदान करता है। पूंजीवादी समाज में, यह संघर्ष मुख्य रूप से पूंजीपति वर्ग (Bourgeoisie) और श्रमिक वर्ग (Proletariat) के बीच होता है।
मार्क्स के अनुसार, पूंजीपति वर्ग उत्पादन के साधनों का मालिक होता है और श्रमिक वर्ग को अपनी श्रम शक्ति बेचकर जीविकोपार्जन करना पड़ता है। यह असमान संबंध श्रमिक वर्ग के शोषण को जन्म देता है, जो अंततः क्रांति की ओर ले जाता है।

*धर्म पर मार्क्स के विचार: एक आलोचनात्मक दृष्टिकोण

मार्क्स ने धर्म को “जनता के लिए अफीम” के रूप में वर्णित किया। उनका मानना था कि धर्म लोगों को वास्तविक दुनिया की समस्याओं से ध्यान भटकाता है और उन्हें एक काल्पनिक दुनिया में सांत्वना प्रदान करता है। धर्म उन्हें सामाजिक अन्याय और शोषण को स्वीकार करने के लिए प्रेरित करता है, क्योंकि यह उन्हें स्वर्ग में पुरस्कारों का वादा करता है।

मार्क्स ने धर्म को एक सामाजिक उत्पाद के रूप में देखा जो सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों से निर्धारित होता है। उनका मानना था कि जब समाज में अन्याय और असमानता खत्म हो जाएगी, तो धर्म की आवश्यकता भी समाप्त हो जाएगी।

मार्क्स के विचारों का महत्व: वर्तमान परिदृश्य में* बलवंत सिंह परगाई ने जोर देकर कहा कि कार्ल मार्क्स एक दूरदर्शी विचारक थे जिन्होंने दुनिया को देखने के तरीके को बदल दिया। “उनके विचारों ने दुनिया भर में सामाजिक आंदोलनों और क्रांतियों को प्रेरित किया है, और आज भी उनके विचारों की प्रासंगिकता बनी हुई है,” उन्होंने कहा।
परगाई ने कहा कि मार्क्स के विचार हमें पूंजीवाद की आलोचना करने, सामाजिक न्याय और समानता के लिए संघर्ष करने और एक बेहतर दुनिया बनाने के लिए प्रेरित करते हैं। आज, जब दुनिया आर्थिक असमानता, सामाजिक अन्याय और पर्यावरणीय संकटों से जूझ रही है, मार्क्स के विचार पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं।

उत्तराखंड सीपीएमएल का आह्वान:

उत्तराखंड सीपीएमएल ने लोगों से मार्क्स के विचारों को गहराई से समझने और उनसे प्रेरणा लेकर एक अधिक न्यायपूर्ण और समतावादी समाज के निर्माण के लिए एकजुट होने का आह्वान किया है। पार्टी ने धर्म के नाम पर होने वाले शोषण और अंधविश्वासों के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और मानवता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का संकल्प लिया है।
निष्कर्ष: कार्ल मार्क्स के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने वे 150 साल पहले थे। उनके नृजातीय शोध, वर्ग संघर्ष के सिद्धांत और धर्म की आलोचना ने दुनिया को देखने के हमारे तरीके को बदल दिया है। हमें उनके विचारों से प्रेरणा लेकर एक बेहतर भविष्य के लिए संघर्ष जारी रखना चाहिए। यह खबर मार्क्स के विचारधाराओं के बारे में थी और हमारे विचारधाराओं का समर्थन नही करती है। यह सिर्फ एक समाचार लेख है।

अतिरिक्त जानकारी: मार्क्स के प्रमुख कार्य:

दास कैपिटल, कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो, जर्मन आइडियोलॉजी मार्क्सवाद के प्रमुख सिद्धांत:
ऐतिहासिक भौतिकवाद, वर्ग संघर्ष, अतिरिक्त मूल्य का सिद्धांत, राज्य का सिद्धांत, सर्वहारा क्रांति उत्तराखंड सीपीएमएल (मार्क्सवादी-लेनिनवादी):** भारत की एक कम्युनिस्ट पार्टी, जो मार्क्सवाद-लेनिनवाद के सिद्धांतों पर आधारित है।

बलवंत सिंह परगाई:** उत्तराखंड सीपीएमएल के एक प्रमुख सदस्य और मार्क्सवादी विचारक।
यह लेख कार्ल मार्क्स के विचारों और उनके वर्तमान प्रासंगिकता पर प्रकाश डालता है। यह मार्क्स के नृजातीय शोध, धर्म पर उनके विचारों और उत्तराखंड सीपीएमएल के आह्वान पर भी ध्यान केंद्रित करता है। यह उम्मीद की जाती है कि यह लेख पाठकों को मार्क्स के विचारों को बेहतर ढंग से समझने और उनसे प्रेरणा लेने में मदद करेगा।
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जहा शिक्षा का स्तर कमजोर है. वहा कुरीतियों, अम्ध्विस्वसो का भंडार है.

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राज्य द्वारा संचालित शैक्षणिक संस्थाओं व विभागों में न तो किसी धर्म का प्रचार किया जाएगा न ही कोई धर्म मिक शिक्षा दी जाएगी और न ही किसी भी धर्म के आचरण व अनुसरण अनुमति दी जाएगी। ( को लागू करना अपराध होगा जो विधि के अनुसार दण्डनीय होगा।
क्या ग़रीबों व मानसिक रूप से विकलांग लोगो का है धर्म?
धर्म के आधार पर वोट अपराध (sc )
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देखिये धार्मिक कुरीतिया हमारे समाज को किस तरह प्रभावित करती है.

https://pargaiwebeng.in/see-how-religious-evils-affect-our-society/
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महिलाओं और बालिकाओं के नाक कान छेदना: हानिकारक प्रथा, संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन

https://pargaiwebeng.in/piercing-of-ears-and-nose-of-women-and-girls-harmful-practice-violation-of-constitutional-rights/

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स्कूल और कॉलेजों में कुप्रथाओं, अन्धविश्वासो को बढावा देने वाले अध्यापको/अध्यापिकाओं पर कार्यवाही आवश्यक है

https://pargaiwebeng.in/action-is-necessary-against-teachers-who-promote-superstitions-and-bad-practices-in-schools-and-colleges/
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बहुजनों के पुरखे हिन्दू नहीं बौद्ध थे महाबोधि महाविहार बहुजनों की विरासत है!

https://youtu.be/H96hbIQbcs8?si=Sod0BPDt-rpmR4ZJ (चन्द्र भान पाल (बी एस एस)
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keevee(n), endeavor security scope backwards security surveillance system. use ms optical recognized computer’s key board. Identify their a top
Adverse. Used asp.net web based data entry and go-to email software {www.}.
+# पुराने धार्मिक, राजनैतिक, तथा एतिहासिक बर्चस्व
के प्रतिमानों को ध्वस्त कर एक नए वर्गहीन व समतामूलक समाज की स्थापना की जाएगी, जो कि भौतिकवादी एवं एक नये प्रकार का समाज होगा। (कार्ल मार्क्स)
(Balwant Singh Pargai Samywadi member of cpiml Uttarakhand)
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@Sociology analyses the social problems and provided solution whereas history’ simply provides description of fact!!
The contributions of “Durkhim” spencer and Max, karl marx weber is significant to develop sociology as a separate displine.
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★कुछ दिनों के बाद मार्क्सवाद-लेनिनवाद भारतवर्ष में आ रहा है। परम्परा ओ को कम करिए!!
★मार्क्सवाद-लेनिनवाद साम्यवादी घोषणापत्र में वर्णित समाजवाद की चरम परिणति की विचारधारा का नाम है।
*★मार्क्सवाद- लेलिनवाद धर्मान्तरण व धर्मभ्रष्ट होने वाली विचारधारा का नाम नही है।
★ मार्क्सवाद-लेलिनवाद एक नई आर्थिक, सामाजिक व राजनैतिक व्यवस्था की विचारधारा का नाम है।
*(बलवंत सिंह परगाई साम्यवादी member of Cpiml Uttarakhand)
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★ अब आप भारतीय कम्युनिस्ट (cpi m-l) पार्टी से जुड़ना चाहेंगे।
CPI (M-l) Voter-Survey-Register
https://thecommunistsocietyofindia.pargaiwebeng.in/…
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मोदीवाद बनाम भाजपा:


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देखिये धार्मिक कुरीतिया हमारे समाज को किस तरह कुप्रभावित करती है
https://pargaiwebeng.in/see-how-religious-evils-maltreated-our-society/
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उत्तर उजाला, अमरउजाला, दौनिक जागरण, हिन्दुस्थान टाइम्स, नवभारत टाइम्स, नवभारत टाइम्स दैनिक भास्कर, मिशन, जयहिन्द राष्ट्रीय सहारा समाचार पत्रों में प्रकाशन हेतु “प्रेषित”

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